NEW ARRIVALS

LIBRARY UPDATES:-

प्रयास आखिरी सांस तक करना चाहिए, या तो लक्ष्य हासिल होगा या अनुभव दोनों ही बातें अच्छी है.

May 15, 2012

व‌र्ल्ड दिस वीक--22 to 28 April 2012

देश की बात--





-नक्सलियों की पकड से छूटे डीएम।


-शीना अग्रवाल बनीं टॉपर


बांग्ला फिल्मों के मशहूर अभिनेता सौमित्र चटर्जी को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार दिया गया है। विज्ञान भवन में आयोजित 59वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में उन्हें इस सम्मान से नवाजा गया। इस दौरान सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार देउल(मराठी) और ब्यारी को दिया गया। सर्वश्रेष्ठ निर्देशन के लिए अन्हें घोडे दान, सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म के लिए चिल्लर पार्टी को सम्मानित किया गया। इस बार से हर बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 3 मई (फिल्म राजा हरिशचंद्र की रिलीज की तिथि) क ो दिए जाएंगे।


-आइएएस परीक्षा में महिलाओं का जलवा। शीना अग्रवाल बनीं टॉपर। रुक्मिणी रियाड को दूसरी पोजीशन।


-12 दिनों क कै द के बाद नक्सलियों की पकड से छूटे सुकमा के कलेक्टर एलेक्स मेनन।






खेल के मैदान से


-रियाल बना चैम्पियन


-नरसिंह यादव को ओलंपिक टिकट


-रियाल मैड्रिड ने 4 साल बाद स्पेनिश लीग खिताब जीता। फाइनल में एथलेटिक बिल्बाओ को 3-0 से पराजित कर 32वीं बार खिताब अपने नाम किया।


-नरसिंह यादव को ओलंपिक का टिकट।


हेलसिंकी में चल रही विश्व ओलंपिक कुश्ती क्वालीफायर के फाइनल में पुहंच ओलंपिक में जगह पक्की की।


-स्पॉट फिक्सिंग मामले में पाक गेंदबाज मोहम्मद आसिफ रिहा।






बात अर्थ जगत की


-प्रणव मुखर्जी एडीबी बोर्ड ऑफ गर्वनेंस अध्यक्ष


-लॉन्च हुई ऑडी ए4


-अमेरिका में एक बार फिर ऑक्यूपाई वॉलस्ट्रीट का आरंभ। न्यूयॉर्क समेत देश के कई बडे वित्तीय केंद्रों में लोगों का प्रदर्शन।


-जर्मन ऑटोमाबाइल कंपनी ऑडी ए4 भारतीय बाजार में लॉन्च की गई।






दुनिया भर की


-सार्वजनिक होंगे लादेन के दस्तावेज


-रूस में विस्फोट

चीन ने अपनी जीपीएस प्रणाली बनाने की ओर बडा कदम बढाया है।। इस प्रयास में उसने बीते दिनों बीदो सीरीज के दो नेवीगेशनल सैटेलाइट लॉन्च किए। नेवीगेशनल तकनीक के जरिए इन सैटेलाइट से किसी व्यक्ति वचीज के ठिकाने का आसानीसे पता लगाया जा सकता है।


-सार्वजनिक होंगे लादेन के दस्तावेज। एबटाबाद हमले के दौरान जब्त अहम जानकारियां इंटरनेट पर डाली जाएंगी।


-रूस के कॉके शस इलाके में हुए दो विस्फोटों में 15 की मौत।






खबरें आस-पास


-सैमसंग ने लॉन्च किया गैलेक्सी एस-3


-नहीं रहीं अचला सचदेव

गुजरे जमाने की मशहूर अभिनेत्री अचला सचदेव (91) नहीं रहीं। वे पिछले कुछ महीने से बीमार चल रहीं थी। अपने जोरदार अभिनय से चरित्र में रंग भर देने वाली अचला को फिल्म वक्त में बलराज साहनी की पत्नी के रूप से सबसे ज्यादा पसंद किया गया। फैशनेबल वाइफ उनकी पहली फिल्म थी। मेरा नाम जोकर, कल आज और कल, आग आरजू उनकी नामी फिल्में हैं।


-मशहूर चित्रकार एडवर्ड मंक की कलाकृति द स्क्र म 11.9 करोड डॉलर में नीलाम। यह अब तक की नीलाम होने वाली सबसे महंगी कलाकृति है। अभी तक स्पेन के महान चित्रकार पाब्लो पिकासो की न्यूड ग्रीन लीव्स एंड बस्ट सबसे महंगी पेटिंग थी।


-भारतीय सिनेमा का अपने सौवें वर्ष में प्रवेश। 3 मई 1913 को धुंदिराज गोविंद फाल्के उर्फ दादा साहेब फ ाल्के कृत भारत की पहली फिल्म राजा हरिश्चंद्र रिलीज हुई थी।


SANTOSH PANDEY, LIBRARIAN 

May 6, 2012

पांच मंत्र जो बनाए सक्सेस का ट्राइएंगल--


          LIBRARY, K V - BHADERWAH


पांच मंत्र जो बनाए सक्सेस का ट्राइएंगल

पांच मंत्र जो बनाए सक्सेस का ट्राइएंगल
सफलता का महान वृक्ष उन छोटे-छोटे दिखने वाले गुणों में छिपा होता है, जिनकी हम अक्सर उपेक्षा करते हैं। वे हमें इसलिए भी निरर्थक लगते हैं, क्योंकि बचपन से हम उनके बारे में सुनते आ रहे हैं लेकिन अचरज तो तब होता है, जब हम इस पुराने बेकार से दिखने वाले चिराग को घिसते हैं और कामयाबी का जिन्न आ खडा होता है। इस कामयाबी के लिए तीन की व‌र्ड्स हैं-नॉलेज, स्किल्स और एक्शन। मंजिल कहीं भी हो, रास्ता यहीं से गुजरेगा।
अप्रैल का महीना हर लिहाज से एक नई शुरुआत लेकर आता है। अप्रैल और मई के बीच प्राय: सभी एकेडमिक और प्रोफेशनल एग्जाम हो जाते हैं और उन्हें अपनी कमियों और गुणों का पता भी चल जाता है। हर कोई सफल होना चाहता है, लेकिन सफलता चंद लोगों को ही मिलती है। पर अहम सवाल है, कि इन्हें कैसे पाया जाए, आखिर कैसे अब तक क्षितिज में दिखने वाली इन चीजों को मुट्ठी में कैद किया जाए। इस संबंध में कामयाब लोगों का मानना है कि अगर आपके पास नॉलेज, स्किल्स और एक्शन है, तो आप किसी भी क्षेत्रों में सफल हो सकते हैं। आपकी सुविधा के लिए यहां सफलता के महत्वपूर्ण की व‌र्ड्स दिए जा रहे हैं, जिसे अपनाकर आप भी सफल हो सकते हैं..
नॉलेज

1. परफैक्ट बेसिक्स नॉलेज

क्रिकेट का बल्ला थामने वाले किसी भी नए खिलाडी को उसके कोच की पहली सीख यही होती है कि बैटिंग के दौरान अपना सिर स्थिर रखो, ज्यादा से ज्यादा सीधे बैट इस्तेमाल करो, कदमों क ा मूवमेंट ठीक रखो। क्रि केट के ये कुछ ऐसे बेसिक्स हैं, जिनको फॉलो किया जाए तो चाहें कैसी पिच हो, कैसा भी गेंदबाज हो, रन बनना तय है। ठीक इसी तरह कॅरियर की पिच पर भी यदि आप अपना बेसिक्स क्लियर रखते हैं तो कामयाबी निश्चित है। आप किसी भी परीक्षा की तैयारी कर रहे हों, यदि आपको पिछली कक्षाओं में पढाए जाने वाले सवालों, फार्मूलों का आधारभूत ज्ञान है, तो प्रतियोगिता का चक्रव्यूह तोडना आसान है। कंपटीशन काफी बढ गया है। स्टूडेंट्स इन दिनों प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी परीक्षा से कई वर्ष पहले ही शुरू कर देते हैं। अगर परीक्षा में सफल स्टूडेंट्स को देखें तो उन्हीं को सफलता मिली है, जिनका बेसिक्स क्लियर रहा है।

2. सही समय पर सही वर्क

अगर आप सफल होना चाहते हैं, तो आपको यह नॉलेज रखना ही होगा कि कौन वर्क पहले और कौन बाद में करना है। इसके अभाव में योग्य रहते हुए भी असफल व्यक्ति बन सकते हैं। दिन में 24 घंटे होते हैं और हर किसी को इतना ही समय मिलता है। अब यह आप पर है कि कैसे इसकी कीमत पहचान अपनी तकदीर लिखते हैं या इन्हें दरकिनार करते हैं। स्टूडेंट्स के लिए वक्त की अहमियत कई गुना है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि कपंटीशन क तैयारी में लगे छात्रों के लिए एक-एक मिनट कीमती है। यदि वे यहां लगातार डेडलाइन बेस्ड स्टडी करते हैं। अपने सभी सब्जेक्ट्स को बराबर समय देते हैं तो किसी भी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। स्टडी ही नहीं, अगर आप जॉब या स्वरोजगार कर रहे हैं, तो इसमें भी टाइम मैनेजमेंट का अहम रोल होता है। यही कारण है कि हर सफल लोग इसे वरीयता सूची में रखते हैं।

3. बढाएं व्यावहारिक नॉलेज

पुरानी कहावत है पढो और साथ में गढो, गढो यानि व्यवहारिक अनुभव अर्जित करो। स्वरोजगार के क्षेत्र में इसकी कदम दर कदम जरूरत पडती है। जानकार भी मानते हैं कि यदि आप किसी क्षेत्र में खुद का कोई,काम प्रारंभ कर रहे हैं, तो उस काम की व्यवहारगत कार्यप्रणाली, बारीकियां व समस्याएं समझना आवश्यक है। इसके लिए संबंधित इंडस्ट्री में थोडे दिन बतौर कर्मचारी काम करना अच्छा विकल्प है। आपने भारतीय मूल की ब्रिटिश उद्योगपति परवीन वारसी जिन्हें लोग प्यार से समोसा क्वीन कहते हैं, का नाम सुना ही होगा। परवीन हर बीतते वक्त के साथ ब्रिटिश उद्योग जगत में चमक बिख्ेारती जा रही हैं। अपनी तरह की पहली महिला उद्यमी परवीन ने जब 70 के दशक में डर्बी स्थित अपने घर से खाना खिलाने का यह काम शुरू किया तो उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि वे एक दिन ब्रिटेन की सबसे धनी महिला उद्यमी बन जाएंगी। खुद उनके ही शब्दों में क्लियर विजन, डिटरमिनेशन, हार्ड वर्क , डिसीजन मेकिंग जैसी चीजों ने उन्हें यहां तक पहुंचाया है। यह सभी गुण निरंतर कार्य करते हुए सीखा जा सकता है। इसके लिए कोई उम्र सीमा और स्थान नहीं है।

4. मौलिकता में है सफलता

किसी ने सच ही कहा है कि कितनी हैरानी की बात है कि इंसान हर समय, हर किसी से मांगता ही रहे, मांगे हुए विचार, उधार ली गई योजनाएं, नकल किए गए हाव-भाव, दूसरों के निर्णयों की मोहताज जिंदगी. क्या ऐसा व्यक्ति कभी सफल हो सकता है, उपरोक्त तथ्य से आज के जमाने में मौलिकता की कीमत समझी जा सकती है। आज सभी क्षेत्रों में मौलिकता की मांग है। अगर आप में मौलिक सोच हो, तो आप कई क्षेत्रों में सफलता की बुलंदियों को छू सकते हैं। इसलिए कहा भी जाता है कि सफल होनेवाले कोई काम अलग नहीं करते हैं, बल्कि उसी काम को अलग ढंग से करते हैं। इस तरह की सोच आप में है, तो आप बेहतर कल की कल्पना कर सकते हैं।

5. समझें लोन व सरकारी नियम

एमबीए सब्जीवाला के नाम से मशहूर कौशलेंद्र का कहना है कि कोई भी रोजगार शुरू करने से पहले यदि आप इससे संबंधित सरकारी नियम व लाभ के बारे में अवगत होते हैं, तो आधी दूरी आप यूं ही तय कर लेते हैं। आजकल स्वरोजगार के क्षेत्र में अवसर का बाईपास तैयार हो चुका है। आप चाहें तो इस बाईपास की मदद से कॅरियर का लंबा व उबाऊ रास्ता आसानी से तय कर सकते हैं। इस काम को सरकारी स्कीमें आसान बना रही हैं। लेकिन इसका फयदा उठाने के लिए आपको इनकी पूरी जानकारी रखनी होगी। जरूरी डॉक्यूमेंट्स व कागजी कार्रवाई के लिए संबंधित संस्थान से पूरी जानकारी अपेक्षित है। इस दौरान अपनी आर्थिक स्थिति का आकलन भी अनिवार्य शर्त है।

एक्शन

1. करो निर्भय निर्णय का नाद
जोदि तोर डाक शुने केऊ न आशे, तोबे एकला चलो रे कविवर रवीद्र नाथ टैगोर ने ये शब्द आज से सालों पहले देश के बुझे जनमानस में नए प्राण फूंकने के उद्देश्य से कहे थे, सोच थी कि इन शब्दों के पाथेय से ऊर्जा ले देशवासी न केवल नए भारत,का सपना देखेंगे, बल्कि इस सपने को हकीकत की जमीन पर भी उतारेंगे। भले ही इसके लिए साथ देने वाला कोई न हो। एकला चलो का यह संदेश कॅरियर के मामले में भी उतना ही सटीक है, जो यह बताता है कि कॅरियर पथ पर कामयाबी उनको ही मिलेगी, जिन्हें इन रास्तों पर बेखौफ चलने का शऊ र आता हो। विशषज्ञों की राय भी इस बाबत जुदा नहीं है। उनका मानना है,कि कॅरियर कोई भी क्यों न हो, एक बार यदि आपने उस पर चलने का निर्णय ले लिया है तो उस निर्णय को अंजाम तक पहुंचाना आपका ही दायित्व होगा। ऐसे में बेहतर होगा कि आपने जो भी फैसला लिया है, उसे अपनी निर्भयता से सफल बनाएं।

2. मेहनत का नहीं है विकल्प
जानी मानी कथाकार व हैरी पॉटर सीरीज की लेखिका जेकेरोलिंग की जीवनी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा का सबब है, जो सफलता तुक्केसे नही मेहनत से अर्जित करना जानते हैं। आज जो जेके रोलिंग टाइम मैग्जीन, फो‌र्ब्स में सुर्खियां पा रही हैं, बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि शोहरत की ऊंचाई छूने से पहले वे बेहद साधारण व संघर्षमय जीवन जी रही थीं। खुद उनके शब्दों में बच्चों की परवरिश, जीवकोपार्जन की जिम्मेदारी के पाटों में पिसती उनकी जिंदगी में केवल रात के ही कुछ पल होते थे, जिसमें वो लेखन कार्य कर पाती थीं, दिन की कडी मेहनत और रात-रात भर जागकर किए गए अनवरत लेखन का ही परिणाम है कि आज मैं यहां तक पहुंच पाई। आपमें से हर किसी के पास जेके रोलिंग बनने की क्षमता और नजरिया है।,जरूरत है,तो बस मेहनत की हदें पार करने की।


3. पहले सोचें और पहले एक्शन लें
आपके विचारों में यदि अविश्वास का घुन लग गया तो विशाल उपलब्धियों की इमारत भी पल भर में ढेर हो जाएगी। संभव है स्वामी रामतीर्थ,ने ये शब्द किसी और परिप्रेक्ष्य में कहे हों, लेकिन आज तेज प्रतिस्पर्धा से भरे कॅरियर में ये शब्द अपनी खास महत्ता रखते हैं। यूं तो खुद पर विश्वास जिंदगी के हर क्षेत्र में काम आता है। लेकिन एक एंटरप्रेन्योर बगैर आत्मविश्वास के एक कदम भी आगे नहीं बढ सकता। स्वरोजगार की राह में सफल वही है, जो न केवल दूसरों से पहले सोचे बल्कि इसे दूसरों से पहले जमीन पर भी उतारे। जाहिर है इस काम में आपकी त्वरित निर्णय क्षमता मददगार होगी। देखा गया है,कि कई,बार बहुत अच्छे आइडियाज पर भी ज्यादा विचार-विमर्श से लाभदायक अवसर हाथ से निकल जाता है।,ऐसे में अहम है कि आप अपनी निर्णय प्रकिया को सुगम बनाएं व वक्त रहते सही फैसला लें।



4. जोखिम को बनाएं तरक्की का औजार
जोखिम लेना सबके बस की बात नहीं होती। इसके लिए हिम्मत चाहिए। अपने फैसलों को सही साबित क रने की इच्छा शक्ति चाहिए। यदि आपके भीतर ये क्षमता है, तो बेहतर होगा कि इसे बाहर निकालिए और इसे अपनी तरक्की का औजार बनने दीजिए। अब तो स्वयं सरकार युवाओं की उद्यमशीलता बढाने हेतु प्रयासरत है। कुटीर उद्योग, छोटे मझोले उद्योगों के लिए सरकार की ओर से प्रशिक्षण केंद्रों, बैंक लोन व सब्सिडी की व्यवस्था की गई है। लिहाजा वे युवा, जिनका रुझान इस क्षेत्र में है, इनकी मदद से कामयाबी के कीर्तिमान गढ सकते हैं।

5. आप करना क्या चाहते हो?
एक समारोह में बोलते हुए एप्पल के सह संस्थापक स्टीव जॉब्स ने बडे पते की बात कही थी कि आपकीजिंदगी का सबसे अहम पल वह होता है,जिसमें आप तय कर पाते हैं कि आपको करना क्या है। जब तक आप तय नहीं कर पाते कौन सा काम आपको सचमुच आनंद देगा, कौन सा काम है, जिसे आप बडा मानते हैं, कौन सा काम है,जिसे आप सबसे बेहतर तरीके से कर सकते हैं, उस काम को लगातर खोजते रहें। स्वरोजगार के क्षेत्र में इन शब्दों की बडी अहमियत है, जहां अपनी क्षमताओं, अपनी शक्तियों, रुचियों की तलाश अनिवार्य है। यदि एक बार आपने ऐसा कर लिया तो पीछे हटने की कोई वजह नहीं हैं।

स्किल्स

1. सॉफ्ट स्किल्स को बनाएं ढाल
आज के दौर में सॉफ्ट स्किल्स की अहमियत से कौन इंकार कर सकता है। बातचीत का बेहतर ढंग, एटीकेट्स, अंग्रेजी का सही इस्तेमाल इन्हीं में आता है। इन सबमें वो ताकत है, जो आपके कॅरियर के ग्रोथ इंजन को तेज कर सकता है। एक प्रतिष्ठित संस्था द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार जॉब्स में उन लोगों क प्रगति अपेक्षाकृत आसान होती है, जो सॉफ्ट स्किल्स में माहिर होते हैं।

2. अनवरत सीखने की जिज्ञासा
कॅरियर में सफलता के लिए भी आपको नई चीजें सीखने के प्रति उत्सुक रहना होेगा। कम्यूटर के छोटे मोटे एप्लीकेशन, राइटिंग, कम्यूनिकेशन, शॉर्ट टर्म कोर्सेस, डिस्टेंस लर्निग कोर्सेस, स्पीकिं ग, टाइपिंग, म्यूजिक यहां तक ड्राइविंग,मैकेनिकगिरी आदि ऐसे ही स्किल्स में शुमार होते हैं। बेहतर होगा कि आप जहां भी रहें, कुछ न कुछ अवश्य सीखते रहें।

3. मल्टी टास्किंग है समय की मांग
आप किसी संस्थान से जुडते हैं तो बेहतर होगा कि खुद को मल्टी टास्िकग में माहिर बनाएं। चाहें आप जॉब में हों या न हों, कामयाब होने के लिए टेक्नोसेवी होना भी अनिवार्य,है। टेक्नोसेवी होने का मतलब कंप्यूटर में दक्षता, सोशल नेटवर्किग की समझ, नेटसेवी, अलग-अलग कंप्यूटर एप्लीकेशन की नॉलेज होना है, जिनका इस्तेमाल जॉब के दौरान करते हैं तो कामयाबी के अवसर बढ जाते हैं।

4. बढाएं कम्युनिकेशन स्किल
मार्केटिंग, टीचिंग, कॉल सेंटर, वकालत समेत सभी क्षेत्रों में अच्छी कम्यूनिकेशन स्किल तरक्की का दूसरा नाम मानी जाती है। यदि आप इस कला में माहिर हैं,तो आपको बढने से कोई नहीं रोक सकता। विशेषज्ञों के अनुसार आज के जमाने में नौकरी पाना अहम है, लेकिन नौकरी में रहते हुए अपनी तरक्की की राह सुनिश्चित करना भी उतना ही अहम है। ऐसे में बढिया कम्यूनिकेशन स्किल आपके बहुत काम आएगी।

5. सीखें नतीजों पर मेहनत करने की कला
आपने ऊंचे आसमान में उडती हुई,चील को तो कई,बार देखा होगा, लेकिन आपमें से बहुत कम को मालूम होगा कि इन चीलों में सब्र बहुत होता है। एक बार अपने शिकार को देख लेने के बाद ये चीलें कई-कई दिनों, हफ्तों, महीनों अपने शिकार को बडी सावधानी से वॉच करती हैं और बेहतर मौका आते ही शिकार उनके पंजों में होता है। कॅरियर की मुट्ठी में कामयाबी की मजबूत पकड के लिए आप में चीलों जैसा धीरज होना जरूरी है। यदि आप करियर के किसी खास मुकाम की तलाश में हैं, तो अच्छा है कि आप नतीजों के लिए मेहनत करें।


SANTOSH PANDEY, LIBRARIAN

May 3, 2012

Important days of MAY--


Important days of MAY month--


LIBRARY KENDRIYA VIDYALAYA - BHADERWAH


Important days of MAY month


Month

Date

DAYS

MAY

1

INTERNATIONAL LABOUR DAY / MAHARASHTRA DAY

MAY

3

WORLD PRESS FREEDOM DAY

MAY

3

INTERNATIONAL ENERGY DAY

MAY

8

WORLD RED CROSS DAY

MAY

11

NATIONAL TECHNOLOGY DAY

MAY

13

NATIONAL SOLIDARITY DAY

MAY

15

INTERNATIONAL DAY OF THE FAMILIES

MAY

17

WORLD TELECOMMUNICATION DAY

MAY

21

ANTI-TERRORISM DAY

MAY

24

COMMONWEALTH DAY

MAY

29

MOUNT EVEREST DAY

MAY

31

ANTI-TOBACCO DAY

MAY

2nd SUNDAY

MOTHER’S DAY

MAY

6 – 12

WORLD NURSES WEEK



S K Pandey - Librarian

April 10, 2012

जनरल नॉलेज : छोटी लेकिन काम की बातें

पुस्तकालय, केंद्रीय विद्यालय - BHADARWAH

क्या तुम जानते हो?????????????????


- प्राणदायक वायु ऑक्सीजन की खोज जोसेफ प्रिस्टले ने की।



- फूलों के अरेंजमेंट की जापानी आर्ट को इकेबाना कहा जाता है।


- दुनिया की सबसे बड़ी नदी नील नदी है।

- दुनिया के सबसे बड़े जलप्रपात नियाग्रा फॉल की खोज लुईस हेन्नेपिन ने की।


- नोबेल पुरस्कार की शुरुआत 1895 में की गई।


- तिब्बत को सामान्यत: दुनिया की छत कहा जाता है।


- पेरिस के एफिल टॉवर का निर्माण अलेक्जेंडर एफिल ने करवाया था।


- मशहूर मोनालिसा की तस्वीर लियोनार्डो द विंसी द्वारा बनाई गई।


- ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है।


- दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान सहारा है।


- दुनिया का सबसे बड़ा महासागर प्रशांत महासागर है।


- ऑस्ट्रेलिया की खोज जेम्स कुक ने की थी।


- 15 अगस्त को भारत के साथ-साथ दक्षिण कोरिया भी अपने स्वाधीनता पर्व को मनाता है।


- न्यूयॉर्क शहर का निक नेम बिग एप्पल है।
 
द्वारा- संतोष पाण्डेय

April 7, 2012

जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्री¨डग----

LIBRARY, KENDRIYA VIDYALAYA - BHADERWAH


अधिक उपज और सुरक्षित पर्यावरण



डीएनए जीवन का आधार है। जेनेटिक तकनीक के माध्यम से डीएनए में फेरबदल किया जाता है और पेड-पौधों में अच्छे गुणों को विकसित किया जाता है। जेनेटिक तकनीक के द्वारा ही रोग प्रतिरोधक फसलें और सूखे में पैदा हो सकने वाली फसलों का उत्पादन किया जाता है। इसके जरिए पेड-पौधों में ऐसे गुण विकसित किए जाते हैं, जिसकी मदद से इनके अंदर बीमारियों से लडने की प्रतिरोधक क्षमता विकसित की जाती है। इसी तकनीक की मदद से फूड भी तैयार किस जाते हैं जो जीएम यानी जेनेटिकली मॉडिफाइड फूड के रूप में जाने जाते हैं। आज देश एवं विश्व के परिदृश्य पर एग्रीकल्चर को नई दिशाएं, आयाम, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्लांट जेनेटिक्स साइंटिस्टों का बहुत बडा योगदान है। एग्रीकल्चर में नई प्रजातियों, हाईब्रिड बीजों को प्लांट जेनेटिक्स साइंटिस्ट के नेतृत्व में विकसित किया जाता है। फल-फूलों की नवीन प्रजातियां किसी का भी मन मोह लेती हैं। वर्तमान में इस फील्ड के जानकारों की डिमांड सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में खूब है। अगर आप इस क्षेत्र में आना चाहते हैं, तो आपके लिए बेहतरीन कॅरियर विकल्प हो सकता है।






कला भी है और विज्ञान भी






प्लांट ब्रीडिंग (पादप प्रजनन) कला व विज्ञान के साथ ही शौक और व्यवसाय भी है। इसके द्वारा नई पादप प्रजातियां, हाईब्रिड, नई फसलों व पौधों के विकास से खाद्य एवं पोषण सुरक्षा की कडी को मजबूत बनाने में आप अपना योगदान दे सकते हैं। इस फील्ड के प्रोफेशनल्स विभिन्न प्रकार के कीट व्याधि अवरोधी, सूखा ऊसर एवं बाढ अवरोधी प्रजातियों का विकास कर लाखों लोगों को भुखमरी से बचा सकते हैं। किसानों को समृद्वि एवं आत्मनिर्भर बनाने को इसके प्रोफेशनल्स कई तरह के वर्क करते रहते हैं। यही कारण है कि जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग का अध्ययन करने वाले स्टूडेंट्स की संख्या दिन प्रतिदिन बढती जा रही है।






जरूरी स्किल्स






1. पेड-पौधों के प्रति लगाव


2. नेतृत्व क्षमता


3. पारखी नजर


4. साइंस के प्रति समर्पण


5. फील्ड व लैब में सतत प्रयत्न करने का विश्वास


6. आंकडों का संग्रहण एवं विश्लेषण क्षमता






एजूकेशनल क्वालिफिकेशन






यदि आप ने किसी भारतीय विश्वविद्यालय या संस्थान से बीएससी एग्रीकल्चर, बीएससी हार्टिकल्चर, बीएससी फॉरेस्ट्री तथा बीएससी बायोलॉजी की उपाधि अर्जित की है या फिर फाइनल ईयर की परीक्षा दी है तो आप एमएससी जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग से रिलेटेड कोर्सो में प्रवेश लेने का आवेदन कर सकते हैं।






जॉब की संभावनाएं






कृ षि विश्वविद्यालयों, डीम्ड यूनिवर्सिटियों, केन्द्रीय विश्वविद्यालय में जूनियर प्लांट ब्रीडर या असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नौकरी की शुरुआत कर सकते हैं। इसके अलावा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के केन्द्रीय कृषि अनुसंधान संस्थानों, राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्रों, फसल शोध निदेशालयों एवं राष्ट्रीय पादप अनुवांशिकी संसाधन ब्यूरो में कृषि शोध सेवा द्वारा वैज्ञानिक पादप प्रजनन, जेनेरिस्ट, साइटो जेनेटिक्स के रूप में कार्य कर सकते हैं। जिस स्टूडेंट ने विश्वस्तरीय शोध करने का सपना देखा है, वह अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शोध संस्थानों में डॉक्टोरल रिसर्च, एसोसिएटशिप तथा उपलब्धियों के आधार पर अन्तरराष्ट्रीय कृषि सेवा में नियुक्तिपा सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न प्रदेशों के महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति पा सकते हैं। प्राइवेट क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध सीड कम्पनियों में आज इस फील्ड के जानकारों की खूब डिमांड है। आप अपनी सीड कम्पनी खोलकर लोगों को रोजगार दे सकते हैं।






प्रमुख कोर्स


 M.Sc in Genetics


 M.Sc in Genetics and Plant Breeding


 M.Sc in Plant Breeding


 M.Sc in Agril. Botany

 M.Phil in Genetics and Plant Breeding


Ph-D Genetics


Ph.D.Genetics and Plant Breeding


Ph.D. Plant Breeding


Ph.D. Agril. Botany






कहां से करें कोर्स






1. इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली


2. चंद्रशेखर आजाद यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, कानपुर

3. चौधरी चरण सिंह हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, हरियाणा


4. सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, इंफाल


5. गोविन्द बल्लभ पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, पंतनगर


6. पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, लुधियाना


7. नरेन्द्र देव यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, फैजाबाद


8. सरदार बल्लभभाई पटेल यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी मेरठ


9. यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंस धारवाड, कर्नाटक






आत्मसंतुष्टि के साथ अपार संभावनाएं






जेनेटिक्स एंड प्लांट बीडिंग ऐसा सब्जेक्ट है, जो आत्मसंतुष्टि के साथ देश की प्रगति में अहम भूमिका निभाता है। अगर आपने सपना देखा है कि देश ही नहीं विश्व में कोई खाली पेट न सोये, तो फसलों का उत्पादन आप डीप अध्ययन और रिसर्च कर बढा सकते हैं। विकसित देश आज भुखमरी से जूझ रहे हैं। अफ्रीकी देशों में अपनी सेवा देकर मानव कल्याण एवं शांति में अपना योगदान दे सकते हैं। रोजगार की दृष्टि से इसमें अपार संभावनाएं हैं। पोस्टग्रेजुएशन और रिसर्च करने के बाद आप देश ही नहीं विदेश में नेम के साथ फेम कमा सकते हैं।


by- S.K.Pandey, Librarian

March 24, 2012

पैरामेडिकल विज्ञान नाम एक कोर्स अनेक--


पुस्तकालय केंद्रीय विद्यालय - भदरवाह


पैरामेडिकल विज्ञान नाम एक कोर्स अनेक




पैरामेडिकल विज्ञान चिकित्सा विज्ञान की महत्वपूर्ण शाखा बनकर उभरा है। कहा जाता है कि यदि पैरामेडिक्स न हों तो चिकित्सा का पेशा शक्तिहीन हो जाएगा। पैरामेडिक्स का प्राथमिक लक्ष्य होता है कि त्वरित चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करना। वर्तमान में यह शाखा संक्रामक एवं गैर संक्रामक रोगों के उपचार में महत्वपूर्ण साबित हुई है।




क्या है पैरा मेडिकल


पैरामेडिकल की कार्यशली एवं स्वरूप को देखते हुए इसे मेडिकल साइंस क्षेत्र में परिभाषित किया जा सकता है। पैरामेडिकल का कोर्स कर चुके प्रोफेशनल्स का कार्य चिकित्सक से मिलता जुलता है। यह प्रोफेशनल्स डायग्नोसिस, फिजियोथेरेपी, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, मेडिकल लैब टेक्नोलोजी आदि का कार्य करते हैं। पैरामेडिकल प्रोफेशनल्स उपचार के दौरान मेडिकल टीम का सपोर्ट करते हैं।


जरूरी स्किल्स


कूल माइंड


सौम्य स्वभाव


गुड कम्यूनिकेशन स्किल्स


हौसला बढाने की क्षमता


टाइम मैनेजमेंट पर पकड


सीखने की ललक


नए प्रयोगों के प्रति सकारात्मक नजरिया




कौन से हैं कोर्स




B.Sc. MLT (B.Sc in Medical Laboratory Technology) n Bachelor of Physio-Therapy (BPT)


Bachelor of Occupational Therapy(BOT)


B.Sc. Medical Radiation Technology (B.Sc.MRT)


B.Sc. (Medical Imaging Technology)


B.Sc. (Medical Radiography Technology)


M.Sc. Medical Laboratory Technology


Diploma in Physio-Therapy (DPT)


Diploma in Medical Lab Technology (DMLT)


Diploma in X-ray Tehnology


Certified Course in Radiographic Assistantship (CRA)






एजूकेशनल क्वालिफिकेशन






पैरामेडिकल से रिलेटेड विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा एवं डिग्री कोर्स संचालित किए जाते हैं। अधिकतर कोर्स के लिए अलग-अलग क्वालिफिकेशन निर्धारित हैं। कुछ संस्थान मेरिट तो कुछ संस्थान इंट्रेंस एग्जामिनेशन आयोजित करते हैं। अधिक जानकारी के लिए पैरामेडिकल से रिलेटेड संस्थान की वेबसाइट का अवलोकन किया जा सकता है।






प्रमुख संस्थान






* आखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान, अंसारी नगर, नई दिल्ली




* बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, वाराणसी




* राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ सेंटर, बेंगलुरू




* जीएसवीएम मेडिकल कालेज, कानपुर




* सीएसजेएम यूनिवर्सिटी, कानपुर





पैरामेडिकल के हॉट सेक्टर






पैरामेडिकल शिक्षा में फिजियोथेरेपी, रेडियोग्राफी, मेडिकल लैब टेक्नोलोजी, ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट, फार्मेसी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी तथा नर्सिग आदि ऐसे हॉट सेक्टर हैं, जिनकी डिमांड देश ही नहीं विदेशी में भी खूब है।






रेडियोग्राफी






रेडियोग्राफी में रेडिएशन के माध्यम से डायग्नोस्टिक टेस्ट किया जाता है। इसमें एक्स-रे, सीटी स्कैन, अल्ट्रा साउंड तथा एमआरआई आदि शामिल हैं। मेडिकल टीम के साथ एक रेडियोग्राफर कार्य करता है। एक रेडियोग्राफर की डिमांड सरकारी या प्राइवेट चिकित्सालय, नर्सिग होम तथा डायग्नोस्टिक सेंटर में हरदम रहती है।


साइंस स्ट्रीम से बाहरवीं उत्तीर्ण स्टूडेंट बीएससी इन रेडियोग्राफी कोर्स कर सकते हैं। इसके अलावा सर्टिफिकेट तथा डिप्लोमा कोर्स का भी ऑप्सन है।






मेडिकल लेबोरेटरी






मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलोजी को क्लीनिकल लेबोरेटरी साइंस भी कहते हैं। इसके अन्तर्गत डायग्नोसिस तथा रोगों से संबंधित टेस्ट किए जाते हैं। जिससे चिकित्सक को उपचार करने में आसानी रहती है। क्लीनिकल टेक्नोलोजी, ब्लड बैंक, माइक्र ोबायोलोजी तथा इम्यूनोलोजी प्रमुख हैं। मेडिकल टेक्निशियन टेक्नोलोजिस्ट एवं सुपरवाइजर के निर्देशन में लेबोरेटरी में रुटीन टेस्ट से संबंधित कार्य करते हैं। यह प्रोफेशनल्स सरकारी एवं प्राइवेट चिकित्सालय, ब्लड डोनेशन सेंटर, इमरजेंसी सेंटर तथा क्लीनिक में जॉब्स करते हैं।






ऑप्टोमेट्री






इसमें मनुष्य के आंख की संरचना तथा उसकी कार्य विधि शामिल है। इसके अन्तर्गत आंखों के प्रारंभिक लक्षण, लेंस का प्रयोग एवं अन्य परेशानियों को परखा जाता है।


ऑप्टोमेट्रिक्स में डिग्री या डिप्लोमा कोर्स किया जा सकता है। इस कोर्स को पूरा करने के बाद नेत्र चिकित्सालय तथा क्लिनिक पर रोजगार आसानी से मिल जाता है। बैचलर ऑफ क्लीनिकल ऑप्टोमेट्री, डिप्लोमा इन ऑप्थलमिक टेक्नीक प्रमुख कोर्स हैं।






रिहैबिलिटेशन






मनोविज्ञान से रिलेटेड हायर एजुकेशन में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। दुर्घटना के बाद ठीक होने के बाद कई बार रोगी को सामान्य जीवन जीने में परेशानी होती है। ऐसे लोगों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने क ा कार्य रिहैबिलिटेशन सेंटर में किया जाता है।






सोचें, परखें फिर लें एडमिशन






किसी भी पैरामेडिकल कोर्स में एडमिशन लेने से पहले स्टूडेंट स्वयं को परख ले कि उसमें सौम्य स्वभाव और सहनशीलता जैसे गुण हैं कि नहीं। यदि गुण हैं तभी वह प्रवेश लें। पैरामेडिकल से रिलेटेड कोई भी एक कोर्स पूरा करके हॉस्पिटल, नर्सिग होम, स्वास्थ्य कल्याण विभाग में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। कॉरपोरेट हॉस्पिटलों के बढते ट्रेंड ने पैरामेडिकल प्रोफेशनल्स की डिमांड बढा दी है।

द्वारा-- संतोष पाण्डेय



March 17, 2012

फॉरेस्ट्री: कॅरियर का ग्रीन सिग्नल

पुस्तकालय  केंद्रीय विद्यालय - भदरवाह


------फॉरेस्ट्री: कॅरियर का ग्रीन सिग्नल------


पुरानी कहावत है कि इंसान के पैदा होने से लेकर मृत्यु तक मनुष्य व वृक्ष का बराबर साथ रहता है। पैदा होने के बाद जहां लकडी का पालना उसे सहारा देता है तो मृत्यु के बाद भी उसे लकडियों के ढेर यानि चिता में आखिरी पनाह मिलती है। यही कारण है कि वृक्षों को हमारी संस्कृति में देव का दर्जा दिया जाता है। ज्यादातर छोटे बडे समारोह, त्योहार बिना वृक्ष पूजन के परिणति तक नहीं पहुंचते। तार्किक नजरिए से सोचें तो धरती पर प्राण वायु यानि ऑक्सीजन का इकलौता जरिया वृक्ष ही हैं उनके आभाव में मानव जीवन पर क्या असर पड सकता है,सोच के ही सिहरन उठती है। ऐसे में यदि हम चाहते हैं कि सौरमंडल में धरती का अद्वितीय ग्रह के रूप में दर्जा सलामत रहे तो फिर वन सुरक्षा के अलावा हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है। यही कारण है कि देश की सरकार वनों की सुरक्षा और उन्हें बढाने के लिए संबंधित विशेषज्ञों की काफी संख्या में नियुक्ति कर रही हैं। इससे बडी संख्या में युवाओं के लिए अवसरों का पिटारा खुल रहा है।



फॉरेस्ट्री में विविधतापूर्ण विकल्प



जाने माने ब्रिटिश प्रकृतिवादी व लेखक जिम कार्बेट ने अपनी एक कहानी में लिखा है कि प्रकृ ति का अध्ययन एक ऐसा विषद विषय है, जिसका कोई ओर-छोर नहीं होता। इसको न तो कहीं से शुरू हुआ न तो कहीं से खत्म हुआ माना जा सकता है। ऐसे में विविधताओं से संपन्न भारतीय वन युवा क ॅरियर को विविधतापूर्ण विकल्प भी देते हैं। लेकिन पहले ऐसा नहीं था, सीमित संभावनाओं केबीच इस क्षेत्र में वन्य अधिकारी, शोध, कंजर्वेशनिस्ट जैसे गिने चुने अवसर ही थे, लेकिन जैसे जैसे फॉरेस्ट, वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन के बारे में लोगों में जागरूकता आई है, यहां काम का दायरा भी बढा है। सरकारी व निजी क्षेत्रों में कई विभाग हैं, जो फॉरेस्ट्री में ग्रेजुएट युवाओं को अवसर दे रहे हैं।



ऑफबीट: खुले नए अवसर



इन दिनों वानिकी में क्वालीफाइड छात्रों के पास फॉरेस्ट, कंजरवेशन के अलावा कई अवसर हैं। लेकिन इन अवसरों की प्रकृति पंरपरागत वानिकी से कुछ हटकर है। तेजी से बदलती परिस्थितियों के बीच बहुत संभव है कि आने वाला कल इन्हीं जॉब्स का हो। टिंबर प्लांटेशन में कार्यरत कॉरपोरेट हाउस, एनजीओ, वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी, फिल्म मेकिंग, लैंडस्केप मैनेजमेंट, जू क्यूरेटिंग, कंसल्टेंसी फ‌र्म्स इसके कुछ उदाहरण हैं।



शोध: अवसरों की रिसर्च- इंवायरनमेंट रिसर्च?के क्षेत्र में हमेशा से ही बढिया संभावनाएं रही हैं। आखिर शोध के ही जरिए हमें वृक्षों,वन्य जीवों में होने वाले बदलावों, लक्षणों प्रजातिगत विभिन्नताओं का पता चलता है। देश में इंडियन कांउसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजूकेशन (आईसीएफआरई), इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल फॉरेस्ट्री एंड इको रिहैबिलिटेशन एंड वाइल्ड लाइफ रिसर्च इंस्टीट्यूट, टाटा एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसे कई प्रीमियर संस्थान हैं, जहां बतौर शोधार्थी?आप जगह बना सकते हैं।



विदेश: मौके हैं हाईप्रोफाइल- देर से ही सही पर्यावरण के बारे में लोग जिम्मेदार हुए हैं। वे न केवल इस दिशा में संगठित प्रयासों के हिमायती हैं बल्कि खुद भी पहल करने से भी नहीं हिचकिचाते। लोगों की इसी ग्लोबल इंवायरनमेंट कंसर्न के चलते आज विदेशों और खासतौर यूएन में क्वालीफाइड युवाओं की मांग बढी है।



कोर्सेज व योग्यताएं हैं अहम



इस फील्ड में कॅरियर की न्यूनतम शर्त बीएससी इन फॉरेस्ट्री है। अगर आप साइंस से बारहवीं हैं, तो इस कोर्स में एडमिशन के लिए योग्य हैं। वानिकी में पीजी डिग्री केलिए आपका इसी विषय में बैचलर होना अनिवार्य है। उच्च स्तर पर फॉरेस्ट्री कोर्सेस का स्पेशलाइजेशन हो जाता है, जिनमें फॉरेस्ट मैनेजमेंट, कॉमर्सियल फॉरेस्ट्री, फॉरेस्ट इकोनॉमी, वुड सांइस, वाइल्ड लाइफ सांइस खासे लोकप्रिय हैं। कई प्रोफेशनल संस्थान पीजीडीएम इन फॉरेस्ट मैनेजमेंट जैसे डिप्लोमा कोर्स भी ऑफर करते हैं।



प्रमुख संस्थान



* फॉरेस्ट्री रिसर्च इंस्टीट्यूट, देहरादून

* इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट, भोपाल, मप्र

* वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून

* कॉलेज ऑफ हॉर्टीकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, सोलन, हिप्र

* कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग,पंजाब

* कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड रीजनल रिसर्च सेंटर, धारवाड, राजस्थान

* कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, उत्तराखंड


फॉरेस्ट्री फॉरेस्ट्री में आज काम का दायरा बढा है। इसके अंतर्गत केवल वनों की ही सुरक्षा एक काम नहीं रह गया है बल्कि इसमें वनो से जुडे औद्योगिक उत्पादन में भी काम की बढिया संभावनाएं हैं। पेपर इंडस्ट्री, फर्नीचर, माचिस जैसे कई काम इसमें ही शुमार होते हैं। तो वहीं इक ोलॉजी, नेचुरल डिजास्टर मैनेजमेंट ,फॉरेस्ट सर्वे, स्वाइल वाटर कंजरवेशन, इको टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में भी फॉरेस्ट्री ग्रेजुएट/पीजी/डिप्लोमाधारी कैंडिडेट्स का बोलबाला रहता है। फॉरेस्ट्री में बढे प्रोफेशनल्स की मांग के चलते आज देश में इससे जुडे संस्थानों की भी कमी नहीं है। आप चाहें तो यहां के फुल ऑफ वैरायटी कोर्सेस में दाखिला लेकर अपना कॅरियर बेहतर बना सकते हैं।



 
चिपको ने बदली तस्वीर



1974 में देश एक बिल्कुल ही नए ढंग के आंदोलन का गवाह बना। आंदोलन की प्रकृति तो गांधीवादी थी, लेकिन यह राजनैतिक सत्ता या फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ आम लोगों की गोलंबदी नहीं थी। यह आंदोलन था वृक्षों के खातिर। हम बात कर रहे रहे हैं सुंदर लाल बहुगुणा के नेतृत्व में उत्तराखंड के (तत्कालीनउत्तर प्रदेश) चमोली जिले में चलाए गए चिपको आंदोलन की। इसमें लोग पेडों के इर्द गिर्द खुद को ह्यूमन शील्ड के तौर पर इस्तेमाल करते थे। नतीजतन पेड काटने वालों के पास इन पेड छोडने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता था। 80 के दशक में चिपको क ा असर देश के कई हिस्सों में दिखा। परिणामस्वरूप, वृक्षों की कटान में तो कमी आई ही, लोगों को जनआंदोलन के महत्व का भी पता चला। आज भी पूरी दुनिया में इस आंदोलन को फॉरेस्ट सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है।



फॉरेस्ट्री: कॅरियर का ऑक्सीजन



धरती इकलौता ऐसा ग्रह है ,जहां जीवन संभव है। यदि हम चाहते हैं कि धरती का यह रुतबा बरकरार रहे तो प्रयास ही आखिरी विकल्प है। वानिकी में मौजूदा कॅरियर इन प्रयासों को गति दे सकते हैं.
पर्यावरण जगत में पिछली एक सदी में जोरदार परिर्वतन देखने को मिले हैं। ग्रीन हाउस गैसें, क्षतिग्रस्त होती ओजोन परत, ग्लोबल वार्मिग, पिघलते ग्लेशियर्स जैसे मुद्दे जो पहले कहीं चर्चा में नहीं थे, आज पर्यावरणविदों की प्रमुख चिंताओं में शुमार होते हैं। मौजूदा परिस्थितियों में यहां कॅरियर के कई अंजाने लेकिन ग्रोथ से भरपूर अवसर दस्तक दे रहे हैं..

 
वाइल्ड लाइफ जर्नलिज्म इस समय यह सबसे हॉट सेक्टर है। जर्नलिज्म से जुडे लोगों के लिए यहां मौके ही मौके हैं। ये लोग वन्य जीवन से जुडी तमाम जानकारियां दर्शकों, पाठकों तक पहुंचाते हैं। वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी, डॉक्यूमेंट्री निर्माण इनके ही काम का हिस्सा होते हैं। वाइल्ड लाइफ की ओर रुझान रखने वाले क्रिएटिव युवाओं के लिए यहां अवसरों की कमी नहीं है।



फॉरेस्ट रेंजर- वनों की अवैध कटाई, शिकार पर लगाम लगाने के साथ सार्वजनिक वनों, अभ्यारणों, राष्ट्रीय उद्यानों में उचित वन्य कानून कापालन करना फॉरेस्ट रेंजर का दायित्व होता है। ये लोग राज्य वन सेवाओं के जरिए चुने जाते हैं।



जू क्यूरेटर- शहरी क्षेत्रों में बने चिडियाघरों व वन्य जीव अभ्यारणों में जानवरों की देखरेख एक अहम काम होता है। जू क्यूरेटर इसी काम को अंजाम देते हैं। बडे-बडे चिडियाघरों में जू मैनेजर व जू क्यूरेटर्स की नियुक्ति की जाती है। आप संबंधित कोर्स करके इस क्षेत्र में प्रवेश पा सकते हैं।



इको टूरिज्म- इको टूरिज्म जुडा तो पर्यटन से है, लेकिन इसमें इकोलॉजी यानि पारिस्थितिकी का भी समावेश होता है। यहांकाम करने वाले लोग टूरिज्म के साथ इकोलॉजी की भी अच्छी खासी नॉलेज रखते हैं। देश के विविधतापूर्ण भौगोलिक व प्राकृतिक दशाओं के कारण आज इको टूरिज्म हॉट जाब बनकर उभर रहा है।



फॉरेस्टर- वन्य जगत में फॉरेस्टर के काम की अपनी ही अहमियत है। यह मुख्यतय: वनों के संरक्षण, परिवर्धन के लिए कार्य करता है। वन्य जीवों के वासस्थान की सुरक्षा, जंगलों में लगने वाली आग से बचाव आदि भी उसके ही कार्यो में आते हैं। वर्तमान में खत्म होती वनों की प्रजातियों के बीच यहां जॉब्स की बढिया गुंजाइश है और भविष्य में काफी संभावनाएं हैं।



डेंड्रोलॉजिस्ट- इसके मुख्य काम वृक्षों का जीवन चक्र, ग्रेडिंग, क्लासीफिकेशन, मेजरिंग, रिसर्च आदि होते हैं। इसके अलावा वृक्षों की सुरक्षा, वैज्ञानिक विधियों की मदद से उनके जीवनकाल में बढोत्तरी जैसे कार्य भी इनकी जिम्मेदारी होती है।



इथनोलॉजिस्ट- इथनोलॉजिस्ट वनों व जैव संपदा में होने वाले परिवर्तन और उनकी कार्यप्रणाली का अध्ययन करता है। जू, एक्वेरियम, लैब्स आदि में जीवों के लिए वासस्थान तैयार करने में इथनोलॉजिस्ट की काफी जरूरत पडती है।



सिल्वीकल्चरिस्ट- सिल्वीकल्चरिस्ट का काम एक नस्ल विशेष के पौधों की खेती व उनकी वृद्धि सुनिश्चित करने का होता है। पौधों की दुर्लभ प्रजाति के विकास में इनका महत्वपूर्ण योगदान होता है।



जनसेवा के साथ एडवेंचर भी: डॉ.बहुगुणा फॉरेस्ट्री में कॅरियर की असीम संभावनाएं हैं। युवाओं का रुझान इस ओर बढा है। इसकी एक वजह तो यह है कि वानिकी सीधे-सीधे आम लोगों को प्रभावित करता है तो दूसरे इसमें जन सेवा के साथ एडवेंचर का भी अच्छा स्कोप है। यह मानना है महानिदेशक, भारतीय वानिकी अनुसंधान व शिक्षा परिषद व वन अनुसंधान संस्थान केकुलपति डॉ. वी.के. बहुगुणा का। पेश है हमारी उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश-



इस क्षेत्र में किस तरह की स्किल्स की दरकार होती है?



वैज्ञानिक जिज्ञासा सबसे जरूरी है। प्रकृति में वनों का विकास कैसे होता है, वनों की गैरमौजूदगी का हम पर क्या असर पड सकता है आदि चीजों की अधारभूत व मौलिक जानकारी आवश्यक है। ज्यादातर वानिकी संस्थान इन्हीं सवालों पर कैंडिडेट्स का चयन करते हैं।



फॉरेस्ट्री के मुख्य सब्जेक्ट क्या हैं?



फॉरेस्टर का क्षेत्र काफी व्यापक है। इसके कोर सब्जेक्ट्स में सिल्वीकल्चर, इकोलॅाजी, फॉरेस्ट मैनेजमेंट, वुड सांइस, क्लाइमेंट चेंज, इकोसिस्टम मैनजमेंट आदि सबसे खास है। इस दौरान कोर्स के अंतर्गत इंवायरनमेंट सब्जेक्ट पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। वहीं पर्यावरण से जुडे मुद्दों को गंभीरता से अध्ययन करें तो बेहतर होगा।



आने वाले समय में इस फील्ड में कैसे अवसर हैं?



धरती की जीवन लायक परिस्थितियों को बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि हम वनों का संरक्षण करें। देखा जाए तो आज वनों का कोई विकल्प भी नहीं है। ऐसे में इस फील्ड में अवसरों का भविष्य अच्छा है। आज की तारीख में करीब डेढ लाख लोग फॉरेस्ट है।


आईएफएस: संवारिए देश की कुदरत



भारतीय वन सेवा ऐसी सीढी है, जो वानिकी में आपको एक अहम मुकाम दे सकती है.. ऑल इंडिया सर्विस एक्ट,1951 के तहत आईएफएस की शुरुआत1966 में हुई। इसक े प्रमुख कार्यो में वनों की सुरक्षा, संवर्धन, वन्य संसाधनों, जैव संपदा का रखरखाव इत्यादि शामिल हैं। वैसे देखा जाए तो इसकी शुारुआत काफी पहले ही ब्रिटिश राज के दौरान1864 में द इंपीरियल फॉरेस्ट सर्विस के नाम से हो गई थी। बाद के सालों में इसमें प्रादेशिक वन सेवा व अन्य अधीनस्थ सेवाएं भी जोडी गई। राष्ट्रीय स्तर पर वन सेवा परीक्षा साल में एक बार आयोजित होती है, जबकि राज्य स्तर पर भी इस परीक्षा का आयोजन होता है।



कैसा है परीक्षा का स्वरूप- संघ लोक सेवा आयोग भारतीय वन सेवा परीक्षा का आयोजन हर साल जुलाई माह में करता है। परीक्षा का मूल प्रारूप सिविल सेवाकी ही तरह है। इसमें चयन केपूर्व कैंडिडेट्स को तीन चरणों की चयन प्रक्रिया से गुजरना पडता है। प्रारंभिक परीक्षा के बाद कैंडिडेट्स का सामना कुल 1400 अंक केसामान्य अंगे्रजी, जीके (अनिवार्य) व दो वैकल्पिक विषय (वन सेवाओं के लिए तय किए विषयों में कोई 2) से होता है। इसके बाद इंटरव्यू (300 अंक) में सफलता के बाद ही उम्मीदवार अंतिम चयन के योग्य माना जाता है।



कौन कौन से हैं पद- वन सेवा में रेंज ऑफिसर, असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट, कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट, चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट,एडिशनल प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट, प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (राज्यों में सर्वोच्च पद) डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेस्ट (सर्वोच्च वन अधिकारी) प्रमुख पद हैं। आईएफएस व राज्य स्तरीय वन सेवाओं में बढिया प्रदर्शन कर आप इन पदों के हकदार बन सकते हैं।



महत्वपूर्ण है एलिजिबिलिटी- 21-30 की उम्र के वे सभी स्नातक आईएफएस परीक्षा के लिए अप्लाई कर सकते हैं जिनके पास स्नातक में एनीमल हसबैंडरी, वेटेरिनरी सांइस, बॉटनी, जूलॉजी, कैमिस्ट्री, मैथ्स, फि जिक्स, स्टेटिस्टिक्स, जिओलॉजी, फॉरेस्ट्री मे से कोई विषय हों या फिर वे इंजीनियरिंग स्नातक हों।



कैसे करें तैयारी- इस परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न सामान्यत: स्नातक स्तर के होते हैं। यूनिवर्सिटी स्तर पर यदि आपकी विषयों पर पकड अच्छी है तो आईएफएस में बेहतर प्रदर्शन की संभावना बढ जाती है। सामान्य ज्ञान के अनिवार्य?पेपर में बेहतर करने के लिए स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं क ा नियमित अध्ययन करें। देश दुनिया में होने वाली हर छोटी बडी घटना से अपडेट रहें। अंग्रेजी के अनिवार्य प्रश्नपत्रों के लिए पुराने प्रैक्टिस पेपर का अधिक से अधिक अभ्यास करें।


द्वारा-- संतोष पाण्डेय


March 10, 2012

ज्योग्राफी- ग्राफ योर कॅरियर


 केंद्रीय विद्यालय- भदरवाह



"ज्योग्राफी- ग्राफ योर कॅरियर"


"भूगोल पृथ्वी की झलक को स्वर्ग में देखने वाला आभामय विज्ञान है"                                                                                                         -क्लाडियस टॉलमी


ज्योग्राफी पृथ्वी पर विभिन्न स्थलों की जानकारी देने के साथ धरातल पर पाए जाने वाले विविध तथ्यों का अध्ययन करती है। इसके अन्तर्गत धरातल के विविध तत्वों के क्षेत्रीय विवरण मात्र ही नहीं बल्कि उनके स्वरूप तथा उत्पत्ति का सकारण विवरण भी प्रस्तुत किया जाता है। सर्वप्रथम प्राचीन यूनानी विद्वान इरैटोस्थनिज ने भूगोल को धरातल के एक विशिष्ट विज्ञान के रूप में मान्यता दी। इसक े बाद हेरोडोटस तथा रोमन विद्वान स्ट्रैबो तथा क्लाडियस टॉलमी ने भूगोल को सुनिश्चित स्वरूप दिया। आज भूगोल में इतने विकल्प हैं कि युवा इस विषय को लेकर बेहतरीन कॅरियर बना रहे हैं और यह हॉट सब्जेक्ट के रूप में उभर रहा है। अगर आप भी इस तरह के कॅरियर की तलाश में हैं, तो यहां आपके पास विकल्पों की कमी नहीं है। आप अपनी पसंद और रुचि के अनुरूप इस विषय से संबंधित अनेक क्षेत्रों में कॅरियर की ऊंची उडान भर सकते हैं।



क्यों पढें ज्योग्राफी ---

ज्योग्राफी का अध्ययन हम सभी स्कूल लेवल से शुरू कर देते हैं, लेकिन कॅरियर के लिए कम से क म स्नातक होना जरूरी है। इस फील्ड से जुडे लोग मौसम की पल-पल की जानकारी आप तक पहु ंचाते हैं। विदेश में इस क्षेत्र से जुडे कॅरियर विकल्पों की कमी नहीं है। लेकिन अब देश में इस सेक्टर के नये विक ल्प खुलते जा रहे हैं। अपार प्राकृतिक संसाधन वाले भारत में सरकार प्राकृतिक सं साधनों के न्यायोचित दोहन पर विशेष ध्यान दे रही है। सरकार जहां प्राकृतिक दोहन संसाधनों के दोहन से रेवेन्यू जुटाना चाहती है, वहीं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रही है। इ सके लिए बडी संख्या में ट्रेंड प्रोफेशनल्स की जरूरत है। इस फील्ड में सरकार प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इस कारण इस फील्ड में संभावनाएं ही सं भावनाएं बढीं हैं और युवा वर्ग इसे कॅरियर के तौर पर चुनने के लिए आगे बढा है, जिससे च्योग्राफी का क्त्रेज बढा है।


जरूरी स्किल्स

* कलात्मक रुचि हो


* मैथमैटिकल नॉलेज


* विषय में रुचि


* विश्व की जानकारी


एजुकेशनल क्वालिफिकेशन--

भविष्य की दृष्टि से ज्योग्राफी में ग्रेजुएशन कॅरियर की पहली सीढी है। ग्रेजुएशन में प्रवेश के लिए 10+2 होना अनिवार्य है। इसके बाद पोस्ट ग्रेजुएशन, एमफिल और पीएचडी कर सकते हैं। इसमें प्रवेश के लिए अधिकतर यूनिवर्सिटियां व संस्थान प्रवेश परीक्षा आयोजित करते हैं तो कुछ मेरिट के आधार पर प्रवेश देते हैं।


कौन से हैं कोर्स ----


* बीए ज्योग्राफी


* बीएससी ज्योग्राफी


* डिप्लोमा इन ज्योमेटिक्स


* एमए ज्योग्राफी


* एम फिल ज्योग्राफी


* एम एस सी अप्लाईड ज्योग्राफी


* एम एस सी ज्यो इंफोमेटिक्स


* एम एस सी ज्योग्राफी


* एम एस सी जीटीए (ज्योग्राफी एंड टूरिज्य एडमिनिस्ट्रेशन)


* मास्टर इन ज्योग्राफिक इंफोमेटिक्स साइंस एंड सिस्टम


* मास्टर इन रिमोट सेंसिंग एंड ज्योग्राफिक इंफोरमेशन साइंस


* पीएचडी ज्यो मैग्नेटिज्म


* पी एच डी ज्योग्राफी


* पोस्ट ग्रेजुऐट डिप्लोमा इन ज्यो इंफोरमेटिक्स


* पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन रिमोट सेंसिंग एंड ज्योग्राफिक इंफोरमेशन साइंस



प्रमुख संस्थान

* जेएनयू नई दिल्ली


* बीएचयू, वाराणसी


* सीएसजेएम यूनिवर्सिटी और सम्बद्ध कालेज, कानपुर


* अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी अलीगढ


* पटना यूनिवर्सिटी, पटना


* पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ



ज्योग्राफी के हॉट सेक्टर

ज्योग्राफी यानि भूगोल का क्रेज विदेशों की तरह अब देश में भी दिन प्रतिदिन बढता जा रहा है। सरकार ने कई ऐसी योजनाएं चलायी हैं जिससे इस फील्ड के प्रोफेशनल्स की डिमांड बढी है। इस फील्ड के कौन-कौन से हैं हॉट सेक्टर..


ज्योग्राफर----

देश में कार्य कर रहे हजारों ज्योग्राफर्स में 80 प्रतिशत से ज्यादा ज्योग्राफर्स एकेडमिक फील्ड से जुडे हैं। ज्योग्राफर्स का कार्य प्रकृति से संबंधित तथ्य तथा जानकारियां जुटाना है। इसके अलावा यह लोग मिट्टी, क्लाइमेंट, लैंड फार्म, प्लांट्स तथा एनीमल से रिलेटेड जानकारियां भी एकत्र करते हैं। इसलिए आंकडों की जरूरत के लिए ज्योग्राफर की डिमांड सरकारी और प्राइवेट सेक्टर दोनों में बढ ी है। एक ज्योग्राफर को यात्रा करने के साथ लम्बे समय तक घर से बाहर रहना पडता है।


जीआईएस स्पेशलिस्ट

ज्योग्राफिक इंफार्मेशन सिस्टम के माध्यम से आप किसी भी स्थान के मौसम, तापमान और प्रदूषण की जानकारी हासिल कर सकते हैं। जीआईएस आकस्मिक दुर्घटना या विपत्ति के समय कुछ मिनट में ही उस जगह की सारी जानकारी एकत्र करने में सक्षम होते हैं। जीआईएस से जुडे कई साफ्टवेयर भी आ रहे हैं जिनसे और भी कई तरह जानकारिया ली जा सकती हैं। जीआईएस स्पेशलिस्ट पॉल्युशन कंट्रोल वाले स्थान को मिनटों में पहचान लेते हैं। प्रोजेक्ट शुरूआत करने के लिए तथा प्रदूषण नियंत्रण के लिए इस फील्ड के विशेषज्ञों का क्रेज बढा है।


सिविल सर्विसेज --

इंडियन सिविल सर्विस परीक्षा में ज्योग्राफी टॉप स्कोरिंग सब्जेक्ट है। इस परीक्षा में यह जनरल स्टडीज पेपर का हिस्सा या ऑप्शनल सब्जेक्ट होता है। यही कारण है कि कई स्टूडेंट्स पोस्ट ग्रेज् ाुएट लेवल तक ज्योग्राफी लेना पसंद करते हैं। सिविल सर्विसेज में यदि आप प्लानिंग करके ज् योग्राफी पढें तो टॉप स्थान हासिल कर सकते हैं। जगह को पर्यावरण के आधार पर समझना, और चल रहे मामलों को प्लानिंग से सही तरह से हैंडल करने की योग्यता ब्यूरोके्र ट्स की निशानी है। इ सलिए यह सब्जेक्ट मददगार साबित होता है।


इंवायरनमेंट स्पेशलिस्ट

ज्योग्राफी में आनर्स डिग्री के साथ इंवायरनमेंट स्टडीज की स्टडी करने वाले स्टूडेंट के लिए यह फ ील्ड बेहतर कॅरियर विकल्प बन सकती है। पर्यावरण विशेषज्ञों की मांग सरकारी विभागों की तुलना में प्राइवेट सेक्टर में काफी है। इंवायरनमेंट एक्सपर्ट के तौर पर आप नेचुरल एरिया मैनेजमेंट, रिसोर्स मैनेजमेंट तथा इंवायरनमेंट इश्यू जैसे एरिया का चयन कर सकते हैं।


अरबन और कम्यूनिटी प्लानर

इनका कार्य जनसंख्या के अनुसार शहर की प्राकृतिक खूबसूरती बनाए रखना, पार्क बनाना तथा भीड भाड को नियंत्रित करना है। ट्रैफिक प्लानिंग तथा मनोरंजन से जुडी चीजों का मैनेजमेंट शामिल है। बिल्डर्स को मास्टर प्लान के तहत शहर को विकसित करने के लिए निर्देशित करना भी अरबन प्लानर के कामकाज के अंतर्गत आता है। इसके लिए तमाम ज्योग्राफिक इंफार्मेशन की जरूरत पढती है, जिसके कारण ज्योग्राफी फील्ड के जानकारों को हाथों-हाथ लिया जाता है।

ट्रैवल प्रोफेशनल्स

ज्योग्राफी और टूरिज्म दोनों में यदि आप ट्रेनिंग ले लें तो कॅरियर की ऊंचाइयां छू सकते हैं। वर्तमान में ट्रैवल और टूरिज्म बूमिंग इंडस्ट्री बन चुकी है। अगर आप को जगह-जगह घूमना पसंद है तो आप के लिए यह जॉब अच्छा है। ट्रैवल प्रोफेशनल्स टूरिस्ट को पहाड, घाटी और ग्लेशियर की ज् ानकारी देने के साथ खतरों से अवगत कराते हैं। ऐसे योग्य प्रोफेशनल्स को अच्छे पैकेज पर हाथों -हाथ रखा जाता है।

BY-- संतोष पाण्डेय

March 3, 2012

साइंस: साइंटिफिक फॉर्मूला-

 LIBRARY, केंद्रीय विद्यालय - भदरवाह  



साइंस: साइंटिफिक फॉर्मूला-



"विज्ञान में वह सारी ताकत है, जिससे हर जरूरतों को पूरा किया जा सके। सवाल सिर्फ यह है कि हम उससे क्या हासिल करना चाहते हैं।"
-पूर्व राष्ट्रपति व मिसाइल मैन, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम



घटना 2004 के उत्तरार्ध की है। बोस्टन में रहने वाले भारतीय मूल के सलमान ने न्यू ओलियांस में रहने वाली अपनी भतीजी के लिए खाली समय में अलग-अलग सब्जेक्ट पर अपने लेक्चर्स को वीडियो रिकॉर्ड कर यू-ट्यूब में डालना शुारू किया। अब नादिया अपने तमाम विषयों से जुडी प्रॉब्लम्स का हल इन वीडियोज में ढूंढ सकती थी, वह भी अपनी सुविधा के अनुसार। वीडियो रिकॉर्डिग के जरिए शुरू हुई अध्ययन-अध्यापन की इस शुरूआत को आज अमेरिका में एजूकेशन क्रांति का दर्जादिया जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर ये सब हुआ कैसे? किस तरह यह असंभव सी दिखने वाली चीज आसान हुई? तो जवाब है विज्ञान के रचनात्मक इस्तेमाल से। इसने एक चीज और स्पष्ट क ी है कि यदि मानव विकास में विज्ञान का तालमेल हो, तो दुनिया की सूरत संवरने में ज्यादा वक्त नहीं लगने वाला। यही कारण है कि हर देश की सरकारें साइंस स्टूडेंट्स को अधिक से अधिक पढाने के लिए अनेक तरह का प्रोत्साहन देती हैं।



क्यों है साइंस का क्रेज?



साइंस में काफी कॅरियर होने की वजह से इसे कॅरियर का खजाना कहा जा सकता है। आज विकास की परिकल्पना साइंस के बिना अधूरी है, क्योंकि नई खोज अनवरत अध्ययन और प्रयोग से संभव होती हैं। साइंस के स्टूडेंट्स अपनी बेहतरीन कॅरियर बनाने के साथ ही देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नई खोज साइंस के बिना संभव नहीं है। इसके अलावा जीवन रक्षक दवाइयों के निर्माण से लेकर देश की सुरक्षा में भी साइंस प्रोफेशनल अहम होते हैं। आज विज्ञान की इतनी शाखाएं हैं कि आप अपनी रुचि और जरूरत के अनुरूप किसी भी क्षेत्र में कॅरियर बना सकते हैं। विज्ञान में अधिक से अधिक प्रोफेशनल्स आने की वजह से ही हम आज तरक्की की ट्रेडमिल पर तेजी से दौड रहे हैं। चीजें धीरे-धीरे ही सही, हमारे अनुकूल हो रही हैं। इसके अलावा 12वीं में यदि आपके पास साइंस है तो आप अपनी मनमर्जी से किसी भी स्ट्रीम में स्विचओवर कर सकते हैं।



माइंड सेट है महत्वपूर्ण



  • सोचने का तरीका अलग होना चाहिए


  • खुद पर भरोसा


  • औरों से अलग बनाने की सोच


  • लगातार प्रयास करने का जज्बा


  • बढिया कैलकुलेशन व तार्किक क्षमता


  • प्रयोग व विश्लेषण में रुचि


  • एकेडमिक लेवल पर साइंस विषय में अच्छे मा‌र्क्स 




  • राष्ट्रीय विज्ञान दिवस








    • देश के जाने माने वैज्ञानिक सी वी रमन ने 28 फरवरी 1928 को अपनी विश्व विख्यात खोज रमन प्रभाव की घोषणा की थी। उनकी इसी उपलब्धि के उपलक्ष्य में भारत सरकार ने पहली बार 28 फरवरी 1987 को विज्ञान दिवस के रूप में मनाया। तभी से हर साल राष्ट्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी परिषद के तत्वाधान में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का आयोजन किया जा रहा है। खोज के लिए उन्हें 1930 में भौतिकी का नोबेल प्राइज मिला। उनकी महान उपलब्धियों और अद्वितीय प्रतिभा को देखते हुए उन्हें 1954 मे भारत रत्न दिया गया। साइंस स्टूडेंट्स के लिए प्रमुख स्कॉलरशिप हैं:



      साइंस स्कॉलरशिप



      राजीव गांधी नेशनल फेलोशिप ल्ल एनसीईआरटी जूनियर प्रोजेक्ट फेलोशिप



      विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (जेआरएफ प्रोग्राम) ल्ल इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च (जेआरएफ प्रोग्राम) ल्ल सीएसआईआर स्कॉलरशिप प्रोग्राम ल्ल लेडी मेहरबाई डी. टाटा स्कॉलरशिप प्रोग्राम ल्ल रमन्ना स्कॉलरशिप प्रोग्राम ल्ल फास्ट ट्रैक स्कीम फॉर यंग स्कॉलरशिप ल्ल नेशनल सांइस ओलंपियाड ल्ल किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना (केवीपीवाई)



      टेक्सटाइल इंजीनिय¨रग



      भारत में बनने वाले कपडे की बढिया क्वालिटी, डिजाइन आदि के चलते भारतीय कपडे व इससे जुडे कच्चे माल की मांग पूरी दुनिया में है। इसी के चलते यह फील्ड साइंस वर्ग केयुवाओं के लिए बेहतरीन राहें देता है। वे सभी युवा जिनके पास चार वर्षीय बीई (टेक्सटाइल), बीटेक (टेक्सटाइल इंजीनियरिंग), एमई, एमटेक जैसी डिग्रियां हैं या डिप्लेामा डिग्रियां हैं, उनके पास इस क्षेत्र में इंट्री के पूरे मौके हैं।



      न्यूक्लियर इंजीनिय¨रग



      न्यूक्लियर एनर्जी को भविष्य का ऊर्जाविकल्प माना जा रहा है। कम प्रदूषणक ारी व ऊर्जा उत्पादन की असीमित क्षमताओं के चलते न्यूक्लियर इंजीनियरिंग में कॅरियर स्कोप बढा है। सांइस (पीसीएम ग्रुप) के स्टूडेंट्स को यह क्षेत्र काफी कुछ ऑफर करता है।



      स्पेस इंजीनिय¨रग



      कृषि, विज्ञान, मेडिकल, जलवायु, डिफेंस जैसे सभी क्षेत्रों के विकास में स्पेस इंजीनियरिंग अप्रत्यक्ष रूप से बडी भूमिका निभाती है। ऐसे में स्पेस इंडस्ट्री विज्ञान वर्ग के छात्रों के लिए उम्दा विकल्प बन चुकी है।



      आईटी



      यदि आप12वीं सांइस स्ट्रीम से हैं तो कंप्यूटर इंजीनिय¨रग में बीटेक, बीई, एमई, एमटेक जैसे कोर्स कर इस सेक्टर में खुद की स्टेबिलिटी तय कर सकते हैं। देश के साथ विदेशों मे बढती आईटी प्रोफेशनल की मांग के कारण इस क्षेत्र में अच्छी कॅरियर ऑपरच्यूनिटीज पनप रही हैं।



      फॉरेस्ट्री



      वानिकी किसी भी देश की पारिस्थतिकी व अर्थव्यवस्था पर गहरा असर छोडती है। इस कारण सरकारें वनों केप्रबंधन पर आज खास ध्यान दे रही हैं। इस फील्ड में ग्रेजुएट व पीजी कोर्सकरके आप वाइल्ड लाइफ व एनीमल से जुडी अनेक संस्थाओं, वन विभाग, वाइल्ड लाइफ कंसल्टेंट के तौर पर काम के अवसर पा सकते हैं।



      एग्रीकल्चर साइंस



      देश के कुल जीडीपी में 23 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले एग्रीकल्चर सेक्टर की अहमियत को कम नहीं आंका जा सकता। एग्रीकल्चर साइंस में ग्रेजुएट व पीजी डिग्रीधारकों के लिए कृषि विवि, एनजीओ, एग्रीकल्चर ऑफिसर,रिसर्चर के तौर पर कॅरियर क ी कई मंजिलें हैं।



      फिशरीज



      ग्लोबलाइजेशन और सी फूड की बढती लोकप्रियता के बीच आज फिशरीज एक फायदेमंद कॅरियर बन चुका है। इस क्षेत्र में प्रोफेशनल्स को फिशरी मैनेजमेंट के साथ फिश जेनेटिक्स, ओसेनोग्राफी, इन्वायरनमेंटल साइंस में भी काम करना होता है।



      स्वायल कंजरवेशन



      भारत जैसे कृषि प्रधान देश में भूमि की उर्वरता, उसकी क्षमताएं काफी मायने रखती है। यही कारण है कि देश की कई एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज में चलने वाले स्वाइल/वाटर कंजरवेशन कोर्स काफी उपयोगी हो चले हैं। इसके अंतर्गत स्वाइल सर्वे, स्वाइल मैनेजमेंट, हाइड्रोलॉजिक प्लान्स की डिजाइन, रिसर्च जैसे काम आते हैं।



      डॉक्टर है पहली पसंद



      विकल्पों की बहुलता के बाद भी12वीं (पीसीबी) स्टूडेंटस की पहली पसंद डॉक्टर बनने का होता है। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां12वीं पीसीबी ग्रुप के लोगों को ही जगह मिलती है। इस फील्ड में आप एमबीबीएस, एमएस, एमडी कोर्स करके कॅरियर को बुलंद रुतबा भी दे सकते हैं।



      बायोइंफॉर्मेटिक्स



      बायोइंफॉर्मेटिक्स एक तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है, जिसमें मॉलीक्यूलर बायोलॉजी के ज्ञान को इंफॉर्मेशन टेक्नोलाजी का कॉन्सेप्ट नईदिशा दे रहा है। इस क्षेत्र में12वीं में सांइस स्ट्रीम के स्टूडेंट्स को वरीयता मिलती है।



      बायोटेक्नोलॉजी



      बदलती लाइफस्टाइल में बायोटेक्नोलॉजी की भूमिका व्यापक हुई है। शायद इसके चलते इस फील्ड में इंट्री लेने वाले छात्रों की तादाद भी बढी है। बायोटेक्नोलॉजी में बीएससी, बीटेक, बीई समेत डिप्लोमा कोर्स के भी ऑप्शन हैं।



      बायोकेमिकल इंजीनियरिंग



      यहां इंजीनियरिंग के कॉन्सेप्ट व बायोलॉजी की समझ दोनों ही अहम हैं। इस क्षेत्र में उपयुक्त योग्यता रखने वालों के पास बायोटेक्नोलॉजी फ‌र्म्स, बायोलॉजिकल लैब्स, फूड बिवरेज कंपनी, एग्रीकल्चर, केमिकल इंडस्ट्री में जॉब्स के पूरे मौके होते हैं।



      फूड टेक्नोलॉजी



      बिजी लाइफस्टाइल के बीच पोषण की बढी जरूरतों के कारण फूड टेक्नोलॉजी आज भरोसेमंद कॅरियर बना है। इसके अंतर्गत फूड प्रोसेसिंग,स्टोरेज व प्रिजर्वेशन, पैकेजिंग, डिस्ट्रब्यूटिंग जैसे काम आते हैं। इसमें बीएससी इन फूड टेक्नोलॉजी (3 साल),एमएससी (2साल) जैसे डिग्री कोर्स के साथ कई सर्टिफिकेट कोर्स भी प्रचलित हैं।



      साइंस: जरूरत ने बदली तस्वीर



      विज्ञान की तेज चाल आज मिथक नहीं बल्कि सुखद सच्चाई है। यही कारण है कि जरूरत के अनुरूप साइंस ने कई नए क्षेत्र डेवलप किए हैं, जिस कारण साइंस के स्टूडेंट्स को कॅरियर च्वाइस के कई विकल्प मिले हैं.. कहा जाता हैकि मानव का पहला अविष्कार पेड के गोल तने से तैयार किया गया पहिया था। वह पहिया जिस पर से लुढकते-लुढकते मानव सभ्यता आज तरक्की क ी रफ्तार पकड चुकी है। तब इंसान को न तो न्यूटन के गति विषयक नियमों की जानकारी थी और न ही घर्षण के सिद्धांत से ही कुछ लेना देना था। बावजूद इसके आवश्यकता का सिद्धांत तो कहीं न कहीं था ही, जिसने तत्कालिक जरूरत के मुताबिक इंसान को अविष्कार करने की सहज प्रेरणा दी। इस दौरान तेजी से वर्गीकरण से साइंस की कई ब्रांचेज भी जन्म ले चुकी हैं। यहां न तो अवसरों की कमी है, न उनसे मिलने वाली सौगातों की। जरूरत है, तो बस रुचि के अनुरूप अपने क्षेत्रों का चयन करके कठिन मेहनत करने की।



      इंजीनियरिंग है बैकबोन



      इंजीनियरिंग सेक्टर देश की इकोनॉमी काबैकबोन कहलाता है। इसकी अहमियत इसलिए भी हैकि देश की तरक्की में योगदान देने वाले कई सेक्टर इससे जुडे हैं। ये सेक्टर तेज विकास दर और जोरदार इंप्लॉयमेंट पोटेंशियल के चलते युवाओं क ी खास पंसद बने हुए हैं। 12वीं के बाद इस क्षेत्र की ओर अधिकतर स्टूडेंट्स का रुझान इसी बात को दर्शाता है। इन सबके बीच यदि आप भी इंजीनियरिंग के बहुरंगी संसार में खुद को आजमाना चाहते हैं तो विकल्प ही विकल्प हैं।



      डिफेंस साइंस स्ट्रीम है मेन स्ट्रीम



      रक्षा क्षेत्र में हमेशा से युवा जोश के साथ-साथ साइंटिफिक सोच की दरकार होती है। यहां बतौर ऑफिसर इंट्री क ी न्यूनतम योग्यता 10+2(सांइस) होती है। इसमें मैथ्स व बायो दोनों ही वर्गो के युवाओं को जगह मिलती है। सेना की मेडिकल कोर, इंजीनियरिंग कोर ,एयरफोर्स में पायलट व अन्य टेक्निकल पोस्ट के लिए साइंस वर्ग के कैंडिडेट्स ही अप्लाईकर सकते हैं। एनडीए, सीडीएस, डायरेक्ट इंट्री स्कीम, एसएसबी जैसे कई माध्यमों से आप सशस्त्र सेनाओं के किसी भी अंग में अपनी जगह बना सकते हैं। इसके अलावा आप कॉलेज में साइंस के लेक्चरर व स्कूलों में साइंस टीचर बनकर आनेवाली पीढी को योग्य बना सकते हैं।



      एग्रीकल्चर: द परफेक्ट कॅरियर ऑप्शंस



      कृषि आज देश के लोगों को रोजगार देने वाला सबसे बडा जरिया है। कुल जीडीपी में इसका बडा योगदान है। कृषि की विषद उपयोगिता देखते हुए इसके प्रसार को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। आज इस क्षेत्र में साइंस स्ट्रीम से संबध रखने वाले फ्रेशर्स, एग्रीकल्चर ग्रेजुएट, एक्सप‌र्ट्स की भारी मांग है।



      मेडिकल में जॉब



      साइंस ग्रुप में केवल मैथ्स ही नहीं बल्कि बायो स्ट्रीम स्टूडेंट्स के लिए भी अच्छे अवसर होते हैं। अब तक माना जाता था कि बायो स्टूडेंट्स के पास अवसर केवल मेडिकल प्रोफेशनल तक ही सीमित हैं, लेकिन यह धारणा पीछे छूटती नजर आ रही है। इन दिनो बायोलॉजी वर्ग के छात्रों के लिए बायो टेक्नोलॉजी, बायोइंफॉर्मेटिक्स से लेकर फूड प्रोसेसिंग, इन्वायरनमेंटल साइंस, एग्रीकल्चर में शानदार मौके पनप रहे हैं। ये सब ऐसे सेक्टर हैं, जिसमें सिर्फ बायो ग्रुप के स्टूडेंट्स ही कॅरियर बना सकते हैं।



      टॉप कॅरियर, टॉप एग्जाम



      एआईईईई व आईआईटीजेईई: इंजीनियरिंग क्षेत्र में टॉप जॉब्स के लिए एआईईईई व आईआईटीजेईई महत्वपूर्ण एग्जाम है। देश के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए हर साल देश के लाखों युवा इन परीक्षाओं भाग लेते हैं।



      एआईपीएमटी: 12वीं बायो वर्ग के वे छात्र जो डॉक्टर बन अपनी किस्मत संवारना चाहते हैं, उनके लिए ये परीक्षा सबसे अहम है। ऑल इंडिया लेवल पर इस परीक्षा का आयोजन देश और राज्य स्तर पर किया जाता है। आईएफएस: भारतीय वन सेवा,अखिल भारतीय सेवाओं में आईएएस,आईपीएस की तीसरी कडी है। वहीं राज्य स्तर पर राज्य वन सेवा व अधीस्थ वन सेवा होती हैं। एग्रीकल्चर व फॉरेस्ट्री में कॅरियर देखने वाले कैंडिडेट्स के लिए यह परीक्षा बडी संभावना जगाती है।



      आईसीएआर: एग्रीकल्चर में प्रवेश चाहने वाले स्टूडेंट्स के लिए यह परीक्षा अहम होती है। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च यानी आईसीएआर यूजी और पीजी प्रोग्राम के लिए एआईईईए परीक्षा आयोजित करती है। बीआईटीएसएटी: यह परीक्षा भी साइंस स्टूडेंट के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इसमें इंजीनियरिंग के अलावा साइंस से रिलेटेड कई तरह के कोर्स की पढाई होती है।



      जेएनयू कम्बाइंड बायोटेक्नोलॉजी टेस्ट: बायोटेक्नोलॉजी में प्रवेश पाने वाले स्टूडेंट्स के लिए यह परीक्षा काफी अहम होती है। बायोटेक्नोलॉजी में प्रवेश के लिए आईआईटी और जेएनयू के अलावा देश में कई बडे संस्थान हैं, जिसमें बेहतरीन कॅरियर बनाया जा सकता है।



      आईआईएसटी: इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी, स्पेस साइंस में रुचि रखनेवाले स्टूडेंट्स को एडमिशन देती है। आप इसमें एडमिशन लेकर स्पेस साइंस से संबंधित कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं।

      BY-- संतोष पाण्डेय